अमृतवर्षा
माता जी का बरस रहा हो, जिसपर कृपा निरंतर,
धन्य-धन्य हो जायेगा गठबंधन, धार पड़ेगा जिसपर ।
बृज बालक, गराापति की ललना, धरो ध्यान तुम उनकी;
जीवन होगा निर्विघ्न बस रहे ध्यान जो उनकी।
कितनी विमल, सुता विमला की, साहेब राज सुत और प्रखर;
अमर तुम्हारा रहे सुहाग,
और तेरा तेज चढ़ जाय शिखर।
माता-पिता, परिजन, पुरजन देव सरीखे,
बरसाते हैं पुष्प गगन से;
मंगल बेला को निरख रहे हैं, सब स्नेह भरे लोचन से।
देख विहँसते टिम-टिम तारे गये कहाँ ?
लगा अरूणोदय को गये बुलाने;
बिखर गयी स्वणिम किरण भी,
तेरा बगिया भी लगी लूभानें ।
कुटीया के साधु अह्वदित अंदर-अंदर,दिवस-निशा क्षण-क्षण गुण गाया; नीलकंठ सा भ्रांति को दाबे, सब कुछ देकर,
लगा-न उनको कुछ दे पाया।
कुसुमपुर की कली प्रियंका,
भवद्वारे अशोक की छाया पाओगी
सास-ससुर, ननद-गोतिन से भरा हुआ घर आंगन पाओगी।
छोटी अम्मा जब वे बोलेगें,
किलकारी में अपनी आनंद ही बाटोगी;
सात भवर के साक्षी सजना को, हर क्षण साथ ही पाओगी।
मंगलमय तेरा जीवन हो, अमर रहे ये गठबंधन;
जनहित जीवन का होवे लक्ष्य, दो पल्लव, पुष्पित, सुरभित होवे क्षण-क्षण।


