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भारत-इस्राइल संबंध: इतिहास की गहराई से आज के रणनीतिक बंधन तक।

एसएन गुलिया

नई दिल्ली/एसएन गुलिया 20 सितंबर।भारत और इस्राइल के मध्य रिश्ते आज राजनीतिक, आर्थिक और संस्कृति-सहयोग के क्षेत्रों में अभूतपूर्व मजबूती दिखा रहे हैं, बावजूद इसके कि हाल के समय में इस्राइल एवं खाड़ी देशों के बीच कड़वाहट बढ़ी है, और भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन-इज़राइल संघर्ष में द्विराष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया है। इस लेख में यह विश्लेषण किया गया है कि ये संबंध कैसे स्थिर बने हुए हैं, और इतिहास की कौन-सी घटनाएँ इस “बंधुत्व” को पुष्ट करती हैं।

इतिहास का अहम अध्याय: हाइफ़ा युद्ध (1918)

संक्षिप्त पृष्ठभूमि

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, 23 सितंबर 1918 को हाइफ़ा की लड़ाई हुई। इस लड़ाई में ब्रिटिश-भारतीय सेना का 15वाँ Imperial Service Cavalry Brigade महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बहादुरी और बलिदान

जबिंदर-भारतीय सैनिकों ने घुड़सवार इकाइयों के माध्यम से—जोधपुर लांसर्स, मैसूर, हैदराबाद आदि से—ओट्टोमन सेनाओं के आधुनिक हथियारों के बावजूद आगे बढ़कर हाइफ़ा पर कब्ज़ा किया।

महानायकों में मेजर दलपत सिंह

इस लड़ाई के प्रमुख कमांडरों में ठाकुर दलपत सिंह शेखावत थे, जिन्हें बाद में ‘Hero of Haifa’ कहकर याद किया गया।

भारत की अंतरराष्ट्रीय नीति: दो-राष्ट्र सिद्धांत और भारत का रुख

भारत समय-समय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस्राइल-फिलिस्तीन विवाद में द्विराष्ट्र सिद्धांत यानी दो राष्ट्रों की स्थापना के पक्ष में खड़ा रहा है।
इसके साथ ही भारत ने हिंसा एवं आतंक के विरुद्ध आपत्तियों की हैं, और मानवाधिकारों तथा अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानूनों का सम्मान करने की बात कही है।

वर्तमान संबंधों के आयाम: सहयोग की मिसालें

रणनीतिक साझेदारी: रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्रों में इस्राइल एवं भारत के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

ऐतिहासिक स्मृति और सार्वजनिक समारोह

हाइफ़ा की लड़ाई की वीरता को याद करते हुए, भारत में इस ऐतिहासिक घटना को स्मरणोत्सवों के माध्यम से जीवंत रखा जा रहा है। उदाहरण स्वरूप, “हाइफ़ा दिवस” के रूप में 23 सितंबर को इस लड़ाई की शहादत को याद किया जाता है।

प्रतिष्ठित व्यक्तियों और प्रतीकों का महत्त्व

दलपत सिंह जैसी हस्तियों की यादों को जीवित रखना, और भारत तथा इस्राइल दोनों देशों में स्मारकों या गौरवपूर्ण मोमेंट्स के माध्यम से इस इतिहास को सार्वजनिक मान्यता देना, इन रिश्तों की बुनियाद को मज़बूत करता है।

खाड़ी देशों के साथ भारत की मित्रता और इस्राइल के साथ रिश्तों का संतुलन

भारत के लिए खाड़ी देश—सऊदी अरब, अरब अमीरात, कुवैत इत्यादि— महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन, निवेश और दक्षिण एशिया-मध्य पूर्व व्यापार के दृष्टिकोण से अहम साझेदार हैं।
खाड़ी देशों के साथ बढ़ी हुई जटिलताएँ—राजनीतिक और सामरिक विभाजन—के बावजूद भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने में सक्षम रहा है।
भारत का फ़ोकस, सामरिक हितों, सुरक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और मानवाधिकारों पर संवाद को प्राथमिकता देना है, जिससे इस्राइल तथा खाड़ी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों में तनाव कम बना है।

निष्कर्ष: रक्त, बंधुत्व और मजबूती

यह स्पष्ट है कि भारत-इस्राइल संबंध केवल वर्तमान के आर्थिक या राजनीतिक हितों पर आधारित नहीं हैं। हाइफ़ा की लड़ाई जैसी ऐतिहासिक घटनाएँ सेंकड़ों साल पुरानी हैं, और ये घटनाएँ बताती हैं कि दोनों देशों के बीच एक गहरा, भावनात्मक और सम्मानपरक रिश्ता है।
जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है, तो वह न्याय, मानवाधिकार और स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाता है। और जब इस्राइल भारत के सुरक्षा, कृषि और तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी करता है, तब यह दिखाता है कि यह रिश्ता सिर्फ शब्दों का नहीं, बल्कि साझा हितों और साहस की गाथाओं से भी बना है।

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