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भोपाल:दुष्यंत संग्रहालय में साहित्यकार डॉक्टर अर्जुन दास खत्री के जन्मदिवस पर किया गया स्मरण।

RKTV NEWS/भोपाल (मध्यप्रदेश)22 जुन। भोपाल में दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में नगर के वरिष्ठ साहित्यकार स्व. डॉक्टर अर्जुन दास खत्री के जन्मदिवस पर उनका पुण्य स्मरण किया गया।
विज्ञप्ति क़े अनुसार स्वर्गीय खत्री का निधन अभी-अभी 28 अप्रैल 2025 को हुआ है। तत्पश्चात आज उनका पहला जन्म दिवस है, जिसे उनके परिवार ने पुण्य स्मरण के रूप में मनाने का निर्णय किया।
कार्यक्रम डॉक्टर उमेश सिंह की अध्यक्षता, डॉक्टर राजेश श्रीवास्तव के मुख्य आतिथ्य, रामराव वामनकर एवं डॉक्टर गौरी शंकर गौरीश के सास्वस्त आतिथ्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में खत्री जी के आत्मीय मित्रों में साहित्यकार गोकुल सोनी, सुरेश पटवा, विनोद जैन भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अर्जुन दास खत्री के व्यक्तित्व की विशेषताओं को रखते हुए कार्यक्रम का संचालन आरम्भ किया।
डॉक्टर उमेश सिंह ने बताया की खत्री जी से उनका परिचय उनकी रीवा पोस्टिंग से था। खत्री जी की जिज्ञासु वृत्ति थी। हर विषय की जड़ में पहुँचकर गहराई से जानने की कोशिश करते थे। उनमें अंत समय तक बालसुलभता थी। वे फ़िल्मी गीतों के भी शौक़ीन थे।
डॉक्टर राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि खत्री जी से मेरा व्यक्तिगत संपर्क था। लेखन के बारे में अक्सर चर्चा करते रहते थे। वे एक ज़िद्दी किस्म से लेखक थे। जो ठान लेते थे उसे पूरा अवश्य करते थे।
गोकुल सोनी ने कहा की खत्री जी कैंसर से लड़ते हुए भी निरंतर साहित्य सृजन में लगे रहे। वे चलते-फिरते चिकित्सक थे। किसी को भी थोड़ा सा बीमार देखते तो दवाइयों का पर्चा लिखकर बाद में उनसे पूछते भी थे कि आराम लगा की नहीं। उनकी किताबें वैज्ञानिक तथ्यों को समावेशित है, एवं उनके लेखन का फलक अत्यधिक विस्तृत है।
गौरीश जी ने खत्री जी को जीवन का खरा अर्जुन निरूपित किया। उन्होंने राष्ट्रीय और आध्यात्मिक विषय पर पुस्तकें लिखीं। रामराव वामनकर ने खत्री जी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
सुरेश पटवा ने बताया कि अर्जुन दास खत्री उस खदान से निकले हीरे थे, जिसे जुझारू पंजाब में खत्री समुदाय के नाम से जाना जाता है। जिस समुदाय से पंद्रहवीं सदी में सिक्ख पंथ का विकास हुआ था। वही जुझारूपन उनके व्यक्तित्व का स्थायी भाव था।
विनोद जैन ने खत्री जी की किताबों के डिजिटलाइजेशन पर विचार रखे कि वे आधुनिकतम विचारों को अंतिम समय तक ग्रहण करते रहे। डॉक्टर प्रेमिला मैनी के खत्री जो कि साथ प्रोफेसर रहीं थीं। उन्हें छोटा भाई मानती थीं। उन्होंने खत्री जी के अनुशासनप्रिय और जुझारूपन को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में खत्री जी के पुत्र धीरज और हिमांशु खत्री भी उपस्थित रहे। अंत में डॉक्टर अर्जुन दास खत्री के सुपुत्र धीरज खत्री ने एवं धर्मपत्नी सुप्रीत खत्री ने उपस्थित साहित्यकारों और लेखकों को धन्यवाद देते हुए उनका आभार माना।
कार्यक्रम में महेश सक्सेना, पुरुषोत्तम तिवारी, मीनू पांडेय नयन, सुनील दुबे वृक्ष मित्र, अवनींद्र खरे, करुणा राजुरकर, कैलाश मेश्राम हरिवल्लभ शर्मा हरि के साथ ही शुभालय पर्ल्स के निवासी, तथा अनेकों साहित्यकार उपस्थित रहे।

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