
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 22 फ़रवरी। भारत प्रसिद्द संत जीयर स्वामी जीमहाराज के मंगलानुशासन मे महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री त्रिदण्डी स्वामी सेवाआश्रम ब्रह्मपुरधाम मे गौरीशंकर पब्लिक स्कूल परिसर मे आयोजित श्रीमद्भागवत भागवत सप्ताह यज्ञमे ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मैन्द्र जी महाराज ने कहा भक्ति ही मुक्ति का श्रेष्ठ साधन है,श्रीमद्भागवतकी कथा से भक्ति पूष्ट होती है और ज्ञान वैराग्य का जागरण होता है।आचार्य जी ने गोवर्द्धन पूजन की कथा कहते हुए कहा कि अहंकार भगवान का खुराक है,गौवर्धन पूजन जहाँ ईन्द्रदेव के अहंकार का मर्दन की कहानी है।वहीं पर्यावरण रक्षण ,योग,उद्योग, सहयोग का संदेश भी है।गोपी विरह की कथा सुनकर भक्त भावुक हुए, आँखों से आँसू टपकते रहे।। कंस मर्दन की जीवन्त चित्रण करते हुए जरासंध की मथुरा पर चढाई की आधयै व्याख्या करतेहुए आचार्य जी गुरूपुत्र की वापसी की मार्मिक कथा कही।द्वारिकाधीश बननेऔर श्रीकृष्णा की क्रमशः आठ और 16,100विवाहों का रहस्यमयी व्याख्या करतेहुए रूकमणि व द्वारिकाधीश की विधिवत विवाह काझांकी का दर्शन कराया, वैदिक मंत्रोव पारंपरिक गीतो से वातावरण मनोहारी बना रहा।श्रीकृष्णा व सुदामा जीके मीलन कथा कहते हुए कहा कि दुनिया के लिए दोस्ती का मिशाल है श्रीकृष्णा सुदामा की दोस्ती,सुदामा जीनेकुछ नहीं मांगा, पर श्रीकृष्णा ने सब कूछ दे दिया।। सुखी व शान्ति मय जीवनकासूत्र बतलाते हुए आचार्य जी ने कहा कि दातात्रेय ने 24गुरु से शिक्षा हासिल की मतलब जहाँ ,जिससे उपयोगी,व्यावहारिक शिक्षा मिले निःसंकोच लेलेना चाहिए । श्रीमद्भागवत का संदेश बतलाते हुए आचार्य जीने कहा मानव मात्र के लिए यह संदेश है हर स्थिति मे प्रसन्न व नारायण हरि के प्रति प्रपन्न रहना चाहिए।56भोग भंडारे, प्रसाद के साथ श्रीमद् भागवत कथा कीपूर्णाहुति हुई।। गौरीशंकर विवाह महोत्सव अन्तर्गत कल से शिवपुराण की कथा प्रारंभ होगी।श्री अवधधाम से विश्वंभरदास जीमहाराज,पं.शशिभूषण शास्त्री जी,दिल्ली से रघुनंदन रामानुज वैष्णव दास,जोखनदास महाराज,शंभु दास महाराज, बासुरिया बाबाआदि संत ,प्रवचनकर्ता पधारे है।
