
कृत्रिम फूलों के व्यवसाय से बनी सफल उद्यमी।

जीविका समूह से 20 हजार के ऋण से की सफल व्यवसाय की शुरुआत।

नई और पुरानी पीढ़ी ले रही व्यंजनों का स्वाद।

युवा वर्ग को लुभा रही जीविका दीदी की कलाकृतियां।

उतरोतर व्यवसाय से समापन की ओर सरस मेला
RKTV NEWS/पटना(बिहार )25 सितंबर।बिहार सरस मेला अब समापन की ओर रुख कर चूका है l पिछले तमाम खरीद-बिक्री के आंकड़ो में उत्तरोत्तर वृद्धि करते हुए बिहार सरस मेला का समापन 27 सितंबर की शाम को होगा l लिहाजा शिल्प, लोक कला, संस्कृति, परंपरा और स्वाद के कद्रदान सरस मेला के विभिन्न स्टॉल्स से जमकर खरीददारी कर रहे हैं।हर उम्र और हर तबके के पसंद के हस्तशिल्प , उत्पाद एवं व्यंजन बिहार सरस मेला में प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए प्रस्तुत है।समापन शुक्रवार को है लिहाजा लोग खरीददारी का कोई मौका चूकना नहीं चाहते हैं।उनके पसंद की हर वस्तु एक ही प्रांगण में मौजूद है।
बिहार ग्रामीण जीविकोप्रजन प्रोत्साहन समिति , जीविका (ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार ) के तत्वाधान में बिहार सरस मेला ज्ञान भवन, पटना में 18 सितंबर 2024 से जारी है l 7 दिनों में लगभग 2 करोड़ 34 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है।
देश के विभिन्न राज्यों से आये ग्रामीण उद्यमी अपने क्षेत्र की कला- संस्कृति तथा हस्तशिल्प का प्रदर्शन सह बिक्री कर रही हैं। बिहार के मिथिलांचल की ओर से मधुबनी चित्रकला, सिक्की कला और मखाना, भागलपुर से सिल्क से बने मनोरम परिधान, कैमूर से दरी और कालीन, मुजफ्फरपुर से लहठी और चूड़ी , पूर्वी चंपारण से आये सीप से बनी कलाकृतियों के साथ-साथ कटिहार के आये बांस से बने गृह सज्जा के उत्पाद, पटना जिले से कांस्य एवं पीतल धातु से बने बर्तन, भोजपुर से क्रोसिया कला, दरभंगा, नालंदा और मधेपुरा से आये चमड़े के उत्पाद, पूर्णिया से आये मलबरी के धागों से बनी सुन्दर साड़ियाँ, गया जिले के पत्थारकट्टी कलाएवं लकड़ियों से बने से बने गृह सज्जा के उत्पादों के सस्थ-साथ भागलपुर, बांका के कतरनी चावल और चुडा ने पूरे सरस मेला को अपनी सुन्दरता और खुशबु से सराबोर कर रही है।बावन बुट्टी, सिक्की कला, सुजनी कला, बंजारा, तंजोर, मिथिला पेंटिंग, मधुबनी पेंटिंग के अतः उत्पादित परिधान एवं सजावट के सामान आगंतुकों को सजह ही लुभा रहे हैं l
लखीसराय जिला अंतर्गत सूर्यगढ़ा प्रखंड के मेदुनी चौक से संजना कुमारी कृत्रिम फूलों का कारोबार करती हैं l मान चंडिका जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने समूह से 20 हजार रूपया ऋण लिया और क्रत्रिम फूल निर्माण एवं बिक्री का कार्य शुरू किया । जीविका से जुड़ने से पहले वो घरेलु महिला थी लेकिन अब उनकी पहचान कुशल व्यवसाई के तौर पर है l इस कार्य में उनके पति अभिषेक कुमार भी उनकी मदद करते हैं l सरस मेला में संजना कुमारी दूसरी बार आई हैं l पिछले दिसंबर माह में गाँधी मैदान में आयोजित सरस मेला में उन्होंने 85 हजार से अधिक की राशी की क्रत्रिम फूलों की बिक्री की थी l इस बार 7 दिनों में उन्होंने लगभग 30 हजार रुपये की राशी की फूलों की बिक्री की हैं l सरस मेला से उन्हें पहचान मिली है और यहाँ आकर उन्हें मुनाफा भी ज्यादा मिलता है।
अन्य राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश से आये शिल्पकारों द्वारा निर्मित मनमोहक दरी और कालीन के साथ-साथ चादर और सोफे पे बिछाए जानेवाले सुन्दर कलाकृतियों और चमरे के उत्पादों के साथ मध्य प्रदेश से आये बूटी प्रिंट की साड़ियाँ, आन्ध्र प्रदेश से आये लकड़ी के गृह सज्जा के उत्पाद, ओड़िसा से आये सवाई घांस से बने साज-सज्जा के उत्पाद एवं सांस्कृतिक परिधान, हरियाणा से एप्लिक कला से सुसज्जित चादर और साड़ियाँ, गुजरात की कच्छ कला से बने परिधान और हस्तशिल्प, झारखंड की आर्टिफिशियल ज्वेलरी , शिल्पकारों द्वारा निर्मित हर्बल औषधि, असाम से आये बांस से बने उत्पाद, पंजाब से आये फुलकारी कला से बने परिधान, दार्जिलिंग के चाय के विभिन्न फ्लेवर एवं हर्बल मोमबत्ती, तेलंगाना का हस्तनिर्मित परिधान, रुमाल, तौलिया , पश्चिम बंगाल से आये खजूर के पत्तों से बने मनमोहक कृत्रिम फूलों एवं पत्थर तथा बांस के बने उत्पाद, छत्तीसगढ़ से आये अत्यंत मनमोहक सलवार-सूट और साड़ियों समेत अन्य कई राज्यों का शिल्प सरस मेला परिसर में देश की संस्कृति एवं हस्तशिल्प को पूर्ण रूप से जीवंत प्रदर्शित है l
मंगलवार को 28 लाख 84 हजार से अधिक की राशी के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है l खरीद-बिक्री का आंकड़ा स्टॉल धारकों द्वारा लिए गए रिपोर्ट के आधार पर आधारित होता है l मंगलवार को 27 हजार से अधिक लोग आये और खरीददारी की l
बिहार सरस मेला का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारित और प्रवेश निःशुल्क है।
