
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)19 अगस्त।फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज टीचर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार (फुटाब) ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग दुर्भाग्य से अभी भी तत्कालीन एसीएस के के पाठक की बाधावादी नीति को आगे बढ़ा रहा है, जो विश्वविद्यालयों की शांति और प्रगति के लिए हानिकारक थी। हालांकि नए एसीएस सकारात्मक रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन अधीनस्थ अभी भी पुरानी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे कार्यरत और सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी दोनों प्रताड़ित हो रहे हैं।
फूटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा और महासचिव संजय कुमार सिंह एमएलसी ने बताया कि वेतन भुगतान करने में सरकार की अनिच्छा इस बात से पता चलती है कि विभाग ने पहले यह शर्त रखी कि जब तक वीसी शिक्षा विभाग में नहीं आएंगे, जब भी उन्हें बुलाया जाएगा, तब तक चालू बजट की समीक्षा नहीं की जाएगी।
ज्ञातव्य है कि अपनी कठिनाइयों को किनारा करते हुए फुटाब एवं अखिल भारतीय शिक्षक संगठन एआईफुक्टो ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और राजभवन सहित कुलपतियों के मान सम्मान की लड़ाई मजबूती से लड़ी जब की कई शिक्षकों और उनके नेतृत्व के लोगों का वेतन /पेंशन रोक दिया गया।
बजट को अंतिम रूप तब भी नहीं दिया गया, जब अदालत के आदेश से सभी कुलपति बैठक में शामिल हुए, तो इस कारण देरी करने की दलील तो समाप्त हो गई, फिर यह दलील दी गई कि जब तक विश्वविद्यालय पीएल खाते में पड़ी राशि वापस नहीं करेंगे, तब तक अनुदान जारी नहीं किया जाएगा,अब एक नया निर्णय लिया गया है कि जब तक विश्वविद्यालय शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा डेटा की जानकारी से विधिवत भरा हुआ 32 से 40 कॉलम का प्रोफार्मा नहीं भेजेंगे, तब तक अनुदान जारी नहीं किया जाएगा। इस शर्त को पूरा होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे. कौन जानता है कि शिक्षा विभाग आगे कौन सी शर्त रखेगा।उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री को भी गुमराह किया गया है।उनकी खामोशी हमें ये समझने पर मजबूर कर देती है।जब की 5अगस्त को उच्च शिक्षा निदेशक ने प्रेस को जानकारी दी थी कि बजट की समीक्षा पुरी हो चुकी है और संचिका उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि जब तक 2024-25 के बजट पर गोल पोस्ट का यह बार-बार बदलाव अंतिम स्कोर तक पहुंचेगा तब तक 2025-26 के बजट की तैयारी की कवायद इस साल नवंबर से शुरू हो जाएगी।जबकि अगस्त के महीने के अंत नजदीक है।नेता द्वय ने बताया की अगर यही स्थिति जारी रही तो राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन का दौर शुरू हो जायेगा, परिणाम चाहे जो हो,काम करके वेतन मांगना विरोध है तो यह आवाज हर सार्वजनिक और संवैधानिक स्थल से उठाते रहेंगे।अनुरोध मजबूरी नहीं शालीनता से बात रखने का जरिया है।
