भोपाल/ मध्यप्रदेश 29 अक्टूबर।भोपाल भारतीय साहित्य एवं कला परिषद भोपाल के तत्वावधान में आयोजित वार्षिक काव्य गोष्ठी में मालवा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से पधारे कवियों ने मनभावन रचनाओं का पाठ किया। वार्षिक काव्य गोष्ठी का आयोजन बिहारी लाल सोनी अनुज के पिताजी स्व बाबूलाल सोनी और माताजी लीला देवी सोनी की पावन स्मृति में उनके निज निवास पर संजय कुमार सरस की अध्यक्षता, गोकुल सोनी के मुख्य आतिथ्य, सुरेश पटवा के सारस्वत आतिथ्य में संपन्न हुआ। सुषमा श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना का गायन किया। बिहारी लाल सोनी ने संस्था का परिचय देकर आमंत्रित अतिथियों का पुलकित हृदय से स्वागत किया। संचालन विमल भंडारी ने किया।
संजय कुमार सरस ने “तुमसे बिछुड़ का तुम्हारी मूरत बना लूँगा”, गोकुल सोनी ने वर्तमान परिवेश पर पढ़ा “उजालों के अंधेरों से अब परस्पर, हो गए अनुबंध कैसा समय आया। झूठ आडंबरमयी जीवन हुआ है, साथ भी देता नहीं अपना ही साया” सुरेश पटवा ने “शरद पूनम का चाँद पूरी चमक-दमक से, कहीं सागर कहीं गागर कहीं शजर में रहता है, डॉक्टर रामवल्लभ आचार्य ने “मन में इतनी उलझन जितने सघन सतपुड़ा वाले वन” विवेक रंजन श्रीवास्तव ने “शब्द तुम्हारे कुछ लेकर घर लौटे तो अच्छा हो”, सुषमा श्रीवास्तव ने “ईश्वर की कृति हैं आँखें”, पुरुषोत्तम तिवारी ने “कब तक झूठे आश्वासन से मन को बहलायें”, प्रदीप मणि तिवारी ध्रुव ने “रहना सुकून से अगर हसरत को मार दे”, महेश चंद सोनी ने “आशु कविता”, डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद ने “इज़्ज़त बिकी सम्मान बिका मान बिका इतना हुआ मज़बूर कि इंसान बिका”, डॉक्टर राजेश तिवारी ने “पत्थर तोड़ते तोड़ते ख़ुद भी पत्थर हो गये हैं”, आदित्य हरि गुप्ता ने “गा रहे हो प्रीत के अतीत गीत क्यों”, तेज सिंह ठाकुर ने “मैं खिलता हुआ हर चमन चाहता हूँ”, गोपेश बाजपेयी ने “माँ ममता की गागरी माँ गुलाल की खान”, मनोज गुप्ता ने “सुख दुख में भेद करें”, डॉक्टर संजय सक्सेना “तुमने फिर आज गुलाब भेजा है और गुलाब में भरकर अपना शबाब भेजा है”, अशोक व्यास ने “तुम्हें देख कर बहक जाऊँगा”, कमल कुमार दूबे ने “तुम बनो प्रीत में प्रेयसी”, जया आर्या ने “ए चाँद बड़ी तमन्ना थी तुझसे मिलने की”, गौरी शंकर शर्मा गौरीश ने “तू किस की किसलय बता”, अभिषेक जैन अबोध ने “किसी की जुल्फ लहराई बदलिया छा गई मन में”, सुधा दुबे ने “मुस्कुराते रहिए जनाब”, लक्ष्मीकांत जावने ने पढ़ा ” मां की कोख में समय, मां की गोद में समय, महेश अग्रवाल ने सुंदर गजल, प्रीयेश गुप्ता ने “सूना है संसार बिना प्रथम प्यार के”, संजय सिंह ने “छोड़कर सारी दुनिया चले जाएँगे”, सरोज लता में “जग में कितना भी कोई प्यारा”, विमल भंडारी से “अवरोधक जीवन के उद्बोधन मुझसे ही” इनके साथ ही मनोरमा चौपड़ा, शरद पटैरिया, परवीन नकवी, कुलभूषण चौपड़ा, अनिल कोचर, आमला से पधारे ओम सोनी गुरु, महेश सोनी, बिहारीलाल सोनी, ने भी रचना पाठ किया। आभार प्रदर्शन मितेश सोनी ने किया।
