दुष्यन्त कुमार संग्रहालय में युवा कवि इन्द्र सिंह अरसेला की दो पुस्तकों ‘मुझको जीकर देख’ और ‘मैं चुप रहा तो’ का लोकार्पण।
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)14 अक्टूबर।नवगीत के प्रख्यात समालोचक वीरेन्द्र आस्तिक ने कहा कि युवा कवि इन्द्र सिंह अरसेला के गीतों में अंतरात्मा की आवाज सुनाई देती है। उनकी रचनाओं में दंभ नहीं, बल्कि करुणा और दया का स्वर प्रमुख है। पुस्तकों के शीर्षक ही उनकी रचनात्मक संवेदना का परिचय देते हैं। वे वागर्थ समूह द्वारा दुष्यन्त कुमार संग्रहालय में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अरसेला की रचनाएं लोकजीवन के निकट हैं। उनके गीतों में वेदना के साथ विद्रोह और बदलाव की आकांक्षा के स्वर भी उभरते हैं। समारोह में युवा कवि इन्द्र सिंह अरसेला की दो पुस्तकों ‘मुझको जीकर देख’ और ‘मैं चुप रहा तो’ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण के बाद वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी ने विमोचित पुस्तकों की प्रति लेखक को भेंट की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ गीतकार मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि कवि की रचनाओं में उनके निजी जीवन के प्रतिबिंब दिखाई देते हैं। उनकी कविताओं में संवेदनाओं की सहज अभिव्यक्ति हुई है। उन्होंने समीक्षकों से आग्रह किया कि वे केवल रचनाओं और रचनाकारों की प्रशंसा तक सीमित न रहें, बल्कि रचनाओं की शिल्पगत त्रुटियों की ओर भी कवि का ध्यान आकर्षित करें।
सारस्वत अतिथि वीरेन्द्र निर्झर ने कहा कि अरसेला के गीतों में शोषित और पीड़ित वर्ग का दर्द अभिव्यक्त हुआ है। उनके गीत जुझारूपन और संघर्ष की प्रेरणा देते हैं। विशिष्ट अतिथि गीतकार कांति शुक्ला ने कहा कि अरसेला अपने गीतों में सत्य को प्रखरता और बिंबात्मक कौशल के साथ अभिव्यक्त करने की कला रखते हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि महेश अग्रवाल और प्रसिद्ध कवयित्री मधु शुक्ला ने लोकार्पित पुस्तकों की समीक्षा करते हुए उनकी विषयवस्तु और विभिन्न रचनात्मक पहलुओं पर चर्चा की। कृतिकार इन्द्र सिंह अरसेला ने अपने दोनों संग्रहों से चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया।
कवि गोष्ठी में रचनाओं का पाठ
पुस्तक लोकार्पण समारोह के बाद आयोजित कवि गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामवल्लभ आचार्य, ऋषि श्रृंगारी, राजेन्द्र गट्टानी, किशन तिवारी, दिनेश प्रभात, हरिवल्लभ शर्मा, दिनेश मालवीय, ममता वाजपेयी, सीमा हरि शर्मा, दीपक पंडित, प्रमोद जैन ‘प्रेम’, प्रतिभा द्विवेदी और नीता सक्सेना ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में नवगीतकार एवं वागर्थ के संस्थापक मनोज जैन ‘मधुर’ ने अतिथियों का पुष्पहारों से स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कवि एवं वागर्थ समूह के एडमिन सुनील चतुर्वेदी ने समूह की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए स्वागत वक्तव्य दिया। लेखिका एवं कवयित्री अनिता तिवारी ने कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन किया। अंत में कवि बी.एल. गोहिया ने आभार व्यक्त किया।

