
RKTV NEWS/चतरा (झारखंड)30 अक्टूबर।समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में उपायुक्त कीर्तिश्री की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास विभाग तथा झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) अंतर्गत संचालित सभी योजनाओं की मासिक प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मनरेगा कार्य, आवास योजनाओं तथा ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत जिला अपने शत-प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त कर चुका है, जो एक सराहनीय उपलब्धि है। वहीं वीर शहीद पोटो हो खेल विकास योजना में कई प्रखंडों द्वारा लक्ष्यों की पूर्ति नहीं किए जाने पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन प्रखंडों में भूमि मिलने या अन्य प्रक्रियागत समस्याओं के कारण कार्य लंबित हैं, उन प्रखंडों के शेष लक्ष्य को अन्य प्रखंडों में हस्तांतरित करते हुए समयबद्ध रूप से लक्ष्य हासिल कराया जाए।
बैठक में आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) की स्थिति की भी समीक्षा की गई तथा श्रमिकों के बैंक खातों को समय पर जोड़ते हुए भुगतान प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
मनरेगा अंतर्गत आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्यों के निष्पादन पर चर्चा में पाया गया कि कुछ संवेदकों द्वारा कार्य में अनावश्यक देर और लापरवाही की जा रही है। उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे संवेदकों को नियमानुसार चिह्नित कर काली सूची में डाला जाए और उनके विरुद्ध सर्टिफिकेट केस की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में गुणवत्तापूर्ण और समय पर कार्य निष्पादन सुनिश्चित हो सके।
उपायुक्त ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) तथा अबुआ आवास योजना के लंबित आवासों को विशेष प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराने का निर्देश देते हुए कहा कि पात्र लाभुकों को आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर विलंब अस्वीकार्य है।
समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि टंडवा, मयूरहंड, प्रतापपुर, गिद्धौर, कान्हाचट्टी, लावालौंग एवं इटखोरी प्रखंडों में मनरेगा मजदूरों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती गई है। इस पर गहरी असंतुष्टि प्रकट करते हुए उपायुक्त ने निर्देशित किया कि मनरेगा एक अधिकार आधारित कार्यक्रम है। मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना प्राथमिक दायित्व है। अतः संबंधित प्रखंडों के बीपीओ के वेतन भुगतान पर अगले आदेश तक रोक लगाई जाए। वेतन स्थगन तभी हटेगा, जब प्रखंड में रोजगार सृजन सुनिश्चित होने लगे और प्रगति स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो।
बैठक में कार्यों में पारदर्शिता, भू-स्तरीय निरीक्षण तेज करने और योजनाओं की मॉनिटरिंग को और मजबूत बनाने पर बल दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि अधिकारियों एवं कर्मियों को फील्ड में अधिक समय देना होगा और प्रत्येक लाभुक को योजनाओं का लाभ समय से मिले, यह सुनिश्चित करें।
बैठक में उप विकास आयुक्त अमरेंद्र कुमार सिन्हा, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, बीपीओ, तथा अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
