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पटना:अटल जी ने ही श्रेष्ठ भारत की नीव रखी थी : मंगल पाण्डेय

साहित्य सम्मेलन में ‘अटल साहित्यकार सम्मान’ से विभूषित हुए साहित्यकार,जयंती पर कवि आरसी प्रसाद सिंह किए गए स्मरण।

RKTV NEWS/पटना(बिहार )19 अगस्त। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और लोकप्रिय कवि अटल बिहारी बाजपेयी भारत के महान नेताओं में से एक थे। वे एक बड़े साहित्यकार थे। वे एक बड़े राजनेता ही नहीं थे, भारत माता के सच्चे लाल थे। भारत को आत्म-निर्भर बनाना है। यह पहली बार अटल जी ने ही कहा था। अटल जी भारत को एक बार पुनः संसार के आचार्य के रूप में देखना चाहते थे और उन्होंने ही एक भारत और श्रेष्ठ भारत की नीव रखी थी। उनके इसी विचार को वर्तमान प्रधान मंत्री आगे बढ़ा रहे हैं।
यह बातें मंगलवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, एडूकेशनल रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट संस्थान के तत्त्वावधान में आयोजित अटल साहित्यकार सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कही। श्री पाण्डेय ने कहा कि अटल जी की चतुर्भुज योजना भारत को एक सूत्र में जोड़ने की योजना थी। उनके साहस और दृढ़ता का परिचायक पोखरण का परमाणु परीक्षण है। वे सीमा की सुरक्षा के लिए सदैव चिंतित रहते थे। शांति और शौर्य के प्रतीक थे अटल जी।
इसके पूर्व समारोह का उद्घाटन करते हुए बिहार भाजपा के अध्यक्ष डा दिलीप जायसवाल ने कहा कि अटल जी के साहित्य की चर्चा का अर्थ है सागर की गहराई की चर्चा। अटल जी कवि-साहित्यकार तो थे ही किंतु समाज और राष्ट्र के लिए अविवाहित रहने का प्रण ले लिया। पूरा देश अपना परिवार है, अटल जी इस भावना से देश को देखते थे। वे एक भारत और श्रेष्ठ भारत की भावना को जीने वाले महान नेता थे।
अपने अध्यक्षीय उद्गार में सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि अटल जी राष्ट्र और राष्ट्रभाषा के प्रति समर्पित भारत के गौरव-पुरुष थे। उनकी काव्य-प्रतिभा और काव्य-दृष्टि भी प्रदीप्त थी। यदि वे राजनीति में नहीं होते तो हिन्दी के महान महाकवियों में परिगणित होते। उनकी वक्तृता ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भी प्रभावित किया था। नेहरू जी ने उनको बधाई देते हुए यह आशीष दिया था कि एक दिन आप भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। आज उनकी स्मृति में आहूत साहित्यकार सम्मान की यज्ञशाला बनकर साहित्य सम्मेलन गौरवान्वित अनुभव कर रहा है। उन्होंने आयोजक संस्था और उसके संचालक डा विनोद शर्मा की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए, सम्मानित हुए विद्वानो और विदुषियों को बधाई दी। डा सुलभ ने जयन्ती पर उत्तर छायावाद के मूर्द्धन्य कवियों में से एक आरसी प्रसाद सिंह को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
इस अवसर पर, डा जंग बहादुर पाण्डेय, डा पूनम आनन्द, आराधना प्रसाद, डा प्रतिभा रानी, डा पुष्पा जमुआर, विभारानी श्रीवास्तव, डा एम के मधु, शंकर कैमूरी, डा पंकज वासिनी, डा मेहता नगेंद्र सिंह, अरविंद कुमार सिंह, डा अर्चना त्रिपाठी, पं गणेश झा, डा पंकज वासिनी, ईं अशोक कुमार, डा शालिनी पाण्डेय, श्रीकांत व्यास, प्रेमलता सिंह, प्रीति सुमन, ब्रह्मानन्द पाण्डेय, सुजाता मिश्र, सिंधु कुमारी, पंकज प्रियम , डा सुषमा कुमारी, कृष्ण रंजन सिंह, अश्विनी कुमार, शशि भूषण कुमार, प्रवीर कुमार पंकज, संगीता मिश्र आदि विदुषियों और विद्वानों को ‘अटल साहित्यकार सम्मान’ से विभूषित किया गया।
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष डा विनोद शर्मा, डा संजय कुमार, पूर्व वन अधिकारी अनिल शर्मा, राजेश भटकु, शशिकान्त ओझा, भानू प्रताप सिंह, नरेश महतो, संगीता सिंह तथा अशोक पाठक ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन रीता शर्मा ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन जनार्दन शर्मा जोगी ने किया।

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