
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)27 मार्च।ब्रह्मपुरधाम गौरीशंकर स्कूल रोड आशादेवी भवन परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के पंचम दिवस की कथा में ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की सभी बाल लीलाएं अद्भुत हैं, चाहे पूतनोद्धार की,चाहे माखनचोरीकी हो,चाहे मीट्टी भक्षण की,चाहे चीरचोरी की,चाहे ऊखल से बंधने की,चाहे नागनाथन की, या गोवर्धन पूजन की सबका विशेष भाव है,रहस्य है।
आचार्य जी ने श्रीकृष्णकी बाल लीलाओं का रहस्यमयी विवेचनकर भक्तों को खूब कथामृत क पान कराया।चीरहरण की कथा करते हुए आचार्य जी ने कहा कि चीरहरण कथा वस्त्र की चोरी नहीं है,वरन जीव और ब्रह्म के बीच जो पर्दे हैं उसको हटाने कीकथा है,यहकथा आकंठ जल में पड़े …जीव को बाहर निकालने की कथा है,यह कथा भक्तों की मनोकामना पूरा करने की कथा है,यह कथा भगवान की भक्तों पर कृपा की कहानी है। ..आचार्य जी ने कहा कि गोपियाँ सधारण जीव नहीं,वरन वर्षो तक भगवान को पाने के लिए तपस्या करने विली है,त्रेतायुग की मिथलानियां है,दंडाकारण्य के ऋषि वृन्द हैं।. आज नंदोत्सव में वैदिक मंत्र सहित लूप्त होते पारंपरिक मांगलिक गीतों यथा सोहर,खेलौना,झूमर,बधैया को सुन भक्त झूमते रहे।
