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बागपत:महिला शौचालय कॉम्प्लेक्स को क्रियाशील बनाए जाने तक डीपीआरओ समेत चार का रोका वेतन।

30 लाख रुपए की लागत से बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर की जर्जर स्थिति पर जिलाधिकारी ने जताई कड़ी नाराजगी।

जिलाधिकारी ने सरूरपुर में तीन तालाबों का निरीक्षण कर जल संरक्षण को बढ़ावा देने पर दिया जोर।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)09 जनवरी। जल संरक्षण और सरकारी संसाधनों की देखरेख को लेकर बागपत प्रशासन ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सरूरपुर गांव में अटल भूजल योजना के तहत बनाए गए जल संचयन इकाई और जीर्णोद्धार किए गए तीन तालाबों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही, गौरीपुर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर और महिला शौचालय कॉम्प्लेक्स का भी जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने सरूरपुर में 32 लाख रुपये की लागत से पुनर्निर्मित तालाबों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पहले यह तालाब दयनीय स्थिति में था, लेकिन अटल भूजल योजना के तहत इसके जीर्णोद्धार से यह अब स्वच्छ और उपयोगी बन गया है। तालाब में वर्षा जल संचयन से न केवल पशुओं को पेयजल मिलेगा, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा।
जिलाधिकारी ने ग्रामवासियों को सतर्क करते हुए कहा कि तालाब में कूड़ा, कचरा या प्लास्टिक डालने से बचें और इसे स्वच्छ बनाए रखना सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लघु सिंचाई विभाग को तालाब की बाउंड्री निर्माण और चारों ओर पौधारोपण कराने का निर्देश दिया। साथ ही, ग्राम पंचायत को सिल्ट केचर की नियमित सफाई करने के लिए कहा। जिलाधिकारी ने कहा कि बागपत और पिलाना ब्लॉक डार्क जोन में आते हैं, जहां भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों को सजल बनाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, और इस तालाब का जीर्णोद्धार उनमें से एक महत्वपूर्ण कदम है।
जिलाधिकारी ने गौरीपुर में आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निरीक्षण किया, जिसकी जुलाई 2024 में 30 लाख रुपये की लागत से निर्माण हुआ था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि निर्माण की गुणवत्ता खराब थी और मंदिर जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जांच के लिए एक दो-सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें अधिशासी अभियंता (PWD) और डिप्टी सीएमओ यशवीर सिंह को शामिल किया गया। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए।
गौरीपुर में महिला शौचालय कॉम्प्लेक्स के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि शौचालय पर ताला लगा था और इसके आसपास उपले पाथे जा रहे थे। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों को सख्त चेतावनी दी और कहा कि जनसुविधाओं को ताले में बंद करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने डीपीआरओ, बीडीओ, एडीओ पंचायत और पंचायत सचिव को निर्देश दिया कि शौचालय को तुरंत क्रियाशील किया जाए और उपलों को हटाया जाए। आदेश का पालन होने तक इन अधिकारियों का वेतन रोकने की सख्त हिदायत दी गई।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जल संरक्षण और सरकारी संसाधनों का क्रियाशील उपयोग प्रशासन की प्राथमिकता है। तालाबों, शौचालयों और अन्य संसाधनों की निगरानी सुनिश्चित करना प्रशासन का कर्तव्य है। उन्होंने ग्रामवासियों से अपील की कि वे इन सुविधाओं का उचित उपयोग करें और स्वच्छता बनाए रखने में योगदान दें। प्रशासन की यह सक्रियता न केवल जनसुविधाओं के सही उपयोग को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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