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“वर्ल्ड बायो फ्यूल डे” आज ही के दिन रखी गई थी भारत प्लस एथनॉल की नींव,सैकड़ों रोजगारो का हुआ था सृजन।

वर्ष 2022 की नावानगर बक्सर में एथनॉल प्लांट का भूमि पूजन करते हुए सीएमडी अजय सिंह की तस्वीर।

RKTVNEWS/बक्सर (बिहार) 10 अगस्त। आज “वर्ल्ड बायो फ्यूल डे” है और आज ही के दिन 10 अगस्त 2022 को भारत प्लस एथनॉल की स्थापना हुई थी जिसकी स्थापना दिवस पर आज
बहुत ही सादगी से भारत प्लस एथनॉल के सीएमडी अजय सिंह की माता देव कुमारी सिंह के द्वारा वर्षगाठ की खुशी में सभी कार्यरत कर्मचारी के बीच मिठाई वितरण कर और अंग वस्त्र से सम्मानित करते हुए पर्यावरण संरक्षण हेतु 51 पेड़ लगाया जायेगा।
दुनियाभर में हर साल 10 अगस्त को वर्ल्ड बायो फ्यूल डे मनाया जाता है। दुनियाभर में बायो फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए इसकी शुरुआत हुई। बायो फ्यूल यानी स्टार्च, शुगर और वेजिटेबल ऑयल के फर्मेन्टेशन से बनने वाला फ्यूल। ये सस्ता होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होता है। फिलहाल पेट्रोलियम प्रोडक्ट में भी एक निश्चित अनुपात में बायो फ्यूल को मिक्स किया जाता है। भारत सरकार बायो फ्यूल को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग योजनाओं पर काम कर रही है। साल 2018 में सरकार ने बायोफ्यूल्स को लेकर एक नेशनल पॉलिसी को भी मंजूरी दी। इस पॉलिसी का लक्ष्य 2030 तक पेट्रोल में 20% और डीजल में 5% तक बायो फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाना है। साथ ही सरकार ने बायो फ्यूल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है। इससे किसानों को फायदा होगा। साल 2015 में सबसे पहले पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। हर साल अलग-अलग थीम पर इस दिन को मनाया जाता है।किसी भी दिवस को मनाने के लिए एक थीम निर्धारित की जाती है। लेकिन साल 2024 के लिए अभी तक कोई भी आधिकारिक थीम की घोषणा नहीं की गई है। इससे पहले साल 2023 में इस दिवस की थीम (Vishwa Jaiv Indhan Divas Theme) ”कार्बन तटस्थ विश्व की ओर जैव ईंधन” रखी गई थी। ईंधन के प्रमुख प्रकार यहाँ दिए गए हैं ।

एथेनॉल

यह एक प्रकार का अल्कोहल है जो आमतौर पर मक्का, गन्ना या अन्य पौधों से प्राप्त किया जाता है। इसे विशेष रूप से पेट्रोल में मिलाया जाता है, जिससे इंटर्नल कंबशन इंजन में ईंधन की दक्षता बढ़ती है और प्रदूषण कम होता है। इस ईंधन की चर्चा आजकल जोरो पर है।

बायोडीजल

यह एक प्रकार का ईंधन है जो वनस्पति तेल (जैसे सोया, ताड़ या कैनोला तेल) या पशु वसा से बनाया जाता है।

बायोगैस

यह एक गैसीय ईंधन है जो जीवित अवशेषों, गोबर या खाद से बनता है। बायोगैस में मुख्य रूप से मीथेन होता है, जिसे ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऐल्गल जैव ईंधन

यह ईंधन माइक्रोएल्गी से प्राप्त किया जाता है। एल्गी में उच्च मात्रा में तेल होता है, जिसे बायोडीजल या अन्य जैव ईंधनों में परिवर्तित किया जा सकता है।
जैव ईंधन के उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी की जा सकती है और यह ग्रीन एनर्जी संसाधनों के विकास में सहायक हो सकता है।

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